डा. भीमराव अम्बेडकर: एक मसीहा
{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{"transform":1},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":true,"containsFTESticker":false,"used_sources":{"version":1,"sources":[{"id":"397630207010211","type":"ugc"}]}}

डा. भीमराव अम्बेडकर: एक मसीहा

डॉ. भीमराव अम्बेडकर: शिक्षा का प्रतीक
डॉ. भीमराव अम्बेडकर, जिन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है, न केवल भारतीय संविधान के निर्माता थे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में असाधारण शैक्षिक उपलब्धियाँ हासिल कीं और समाज को शिक्षा का महत्व समझाया।शिक्षा यात्रा:1912 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में बीए की डिग्री।1916 में कोलंबिया विश्वविद्यालय, अमेरिका से अर्थशास्त्र में एमए और पीएचडी।1923 में लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से डीएससी (डॉक्टर ऑफ साइंस) की उपाधि।वे बैरिस्टर भी बने और ग्रे’स इन, लंदन से कानून की पढ़ाई पूरी की।शिक्षा पर विचार:
बाबासाहेब मानते थे कि “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीता है वह दहाड़ता है।” उनका मानना था कि शिक्षा ही सामाजिक बराबरी और आत्म-सम्मान का आधार है। उन्होंने दलितों और वंचितों को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया।योगदान:
उन्होंने शिक्षा के प्रसार के लिए कई संस्थानों की स्थापना की, जैसे पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी, और मिलिंद कॉलेज की शुरुआत की।डॉ. अम्बेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि आजादी और सशक्तिकरण का मार्ग है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *