भारत में शिक्षा विकास : आयोग/समितियां

आयोग /समिति का नाम: 

मैकाले का विवरण पत्र

गठन का वर्ष:

1835 ई

अध्यक्ष:

लार्ड मैकाले

प्रमुख सुझाव:

शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बनाने और स्कूलों में पाश्चात्य साहित्य और विज्ञान की शिक्षा देन पर जोर।


आयोग /समिति का नाम: 

वुड का घोषणा पत्र

गठन का वर्ष:

1854 ई.

अध्यक्ष:

चार्ल्स वुड

प्रमुख सुझाव:

माध्यमिक विद्यालयों में आर्थिक सहायता हेतु अनुदान प्रणाली का सुझाव दिया तथा अंग्रेजी की अच्छी शिक्षा प्राप्त करने वाले को सरकारी नौकरी देने पर विशेष बल दिया गया।


आयोग /समिति का नाम: 

भारतीय शिक्षा आयोग

गठन का वर्ष:

1882 ई.

अध्यक्ष:

सर विलियम हंटर

प्रमुख सुझाव:

माध्यमिक शिक्षा में विविधीकृत पाठ्यक्रमों के रूप में एकेडमिक तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अलग अलग लागू करने का सुझाव दिया गया।


आयोग /समिति का नाम: 

विश्वविद्यालय आयोग

गठन का वर्ष:

1902 ई.

अध्यक्ष:

लार्ड कर्जन

प्रमुख सुझाव:

इण्टरमीडिएट कक्षाएं तोडने तथा केवल मान्यता प्राप्त विद्यालय के विद्यार्थियों को ही मैट्रीकुलेशन परीक्षा में सम्मिलित होने का सुझाव दिया गया।


आयोग /समिति का नाम: 

सैडलर आयोग

गठन का वर्ष:

1917 ई.

अध्यक्ष:

माइकल सैडलर

प्रमुख सुझाव:

माध्यमिक शिक्षा को विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखकर इण्टरमीडिएट कालेजों की स्थापना करने और प्रत्येक प्रांत में माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना का सुझाव दिया गया।


आयोग /समिति का नाम: 

हर्टाग समिति

गठन का वर्ष:

1929 ई.

अध्यक्ष:

सर फिलिप हर्टाग

प्रमुख सुझाव:

माध्यमिक शिक्षा में बच्चों के अधिक अनुत्तीर्ण होने के फलस्वरूप अत्यधिक अपव्यय को देखते हुए व्यावसायिक विषयों को स्थान दिए जाने का सुझाव दिया गया।


आयोग /समिति का नाम: 

वुड एक्ट

गठन का वर्ष:

1936 ई.

अध्यक्ष:

एस. एच. वुड

प्रमुख सुझाव:

हाईस्कूल तक सभी कक्षाओं में भारतीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाया जाए।


आयोग /समिति का नाम: 

सार्जेंट रिपोर्ट

गठन का वर्ष:

1944 ई.

अध्यक्ष:

सर जान सार्जेंट

प्रमुख सुझाव:

साहित्यिक तथा प्राविधिक दोनों तरह के विद्यालयों की स्थापना की जाए तथा अगली कक्षाओं में केवल योग्य विद्यार्थियों को ही प्रवेश दिया जाए।


आयोग /समिति का नाम: 

ताराचंद समिति (माध्यमिक शिक्षा समिति)

गठन का वर्ष:

1948 ई.

अध्यक्ष:

डा. ताराचंद

प्रमुख सुझाव:

माध्यमिक शिक्षा 12 वर्ष की जाए , उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को बहुद्देश्यीय विद्यालयों में परिवर्तित कर दिया जाए।माध्यमिक शिक्षा की जांच हेतु एक आयोग का गठन किया जाए।


आयोग /समिति का नाम: 

 राधाकृष्णन आयोग (विश्वविद्यालय आयोग)

गठन का वर्ष:

1948 ई.

अध्यक्ष:

डा. एस. राधाकृष्णन

प्रमुख सुझाव:

वैसे तो यह उच्च शिक्षा में सुधार हेतु गठित हुआ था लेकिन माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के रिफ्रेशर कोर्स चलाने तथा माध्यमिक स्तर पर अंग्रेजी की शिक्षा अनिवार्य करने का सुझाव दिया।


आयोग /समिति का नाम: 

मुदालियर आयोग ( माध्यमिक शिक्षा आयोग)

गठन का वर्ष:

1952 ई.

अध्यक्ष:

 डा. एस लक्ष्मण स्वामी मुदालियर

प्रमुख सुझाव:

12 वीं कक्षा को विश्वविद्यालय से जोड दिया जाए तथा बहुद्देश्यीय विद्यालय स्थापित किए जाएं।


आयोग /समिति का नाम: 

आचार्य नरेन्द्र देव समिति

गठन का वर्ष:

1953 ई.

अध्यक्ष:

आचार्य नरेन्द्र देव

प्रमुख सुझाव:

उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा के पुनर्गठन हेतु सुझाव दिए जो अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी थे।


आयोग /समिति का नाम: 

श्रीमाली समिति

गठन का वर्ष:

1954 ई.

अध्यक्ष:

डा. के.एल.श्रीमाली

प्रमुख सुझाव:

ग्रामीण समस्याओं के समाधान हेतु ग्राम विद्यापीठों को प्रोत्साहन दिया जाए तथा सरकारी अनुदान दिया जाए।


आयोग /समिति का नाम: 

कोठारी आयोग (शिक्षा आयोग)

गठन का वर्ष:

1964 ई.

अध्यक्ष:

डा. डी.एस. कोठारी

प्रमुख सुझाव:

उच्च माध्यमिक शिक्षा को समाज की मांग के अनुरूप तथा केवल चयनित विद्यार्थियों के लिए ही दी जाए।


आयोग /समिति का नाम: 

आचार्य राममूर्ति समिति

गठन का वर्ष:

1990 ई.

अध्यक्ष:

आचार्य राममूर्ति

प्रमुख सुझाव:

नई शिक्षा नीति 1986, की समीक्षा हेतु इस समिति द्वारा नवोदय विद्यालय को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने तथा माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को बढावा देने पर जोर दिया गया।


आयोग /समिति का नाम: 

विद्यालय पाठ्यक्रम पुनरावलोकन समिति

(यशपाल समिति)

गठन का वर्ष:

1992 ई.

अध्यक्ष:

प्रो. यशपाल

प्रमुख सुझाव:

समिति द्वारा विद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रम का बोझ कम करने तथा उसे अधिक तर्कसंगत और व्यावहारिक बनाने का सुझाव दिया गया।

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