69000 शिक्षक भर्ती में नया मोड

दोस्तों 69000 शिक्षक भर्ती में अब एक नया मोड आ चुका है। चार साल पहले हुई इस भर्ती में आरक्षण के प्रावधानों का पालन न करने का आरोप लगा है जिसकी वजह से इलाहाबाद हाइकोर्ट की डबल बेंच ने पुरानी मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है जिसके आधार पर यह भर्ती की गई थी और कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुनः नए सिरे से गलतियों को सुधारते हुए मेरिट लिस्ट बनाई जाए। इसके लिए सरकार को तीन महीने का समय भी दिया गया है। 

मामला कैसे फंस गया ? 

दरअसल हुआ यह कि जो अभ्यर्थी सामान्य मेरिट में फाइट किए थे उनका चयन सामान्य वर्ग में न करके आरक्षित श्रेणी में कर दिया गया था जिसकी वजह से आरक्षित श्रेणी की सीटें कम हुई और बहुत से आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी जिनका चयन हो सकता था, नहीं हुआ।

आरक्षित वर्ग के वे अभ्यर्थी जो सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में आते हैं, उन्हें सामान्य वर्ग में समायोजित किया जाना चाहिए। साथ ही ऊर्ध्वाधर आरक्षण का लाभ क्षैतिज आरक्षण श्रेणियों को भी दिया जाना चाहिए। इसके अलावा हाई कोर्ट ने एकल पीठ के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें 5 जनवरी, 2022 को आरक्षित वर्ग के 6,800 उम्मीदवारों की चयन सूची रद्द कर दी गई थी। पीठ ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर नई चयन सूची जारी करने की प्रक्रिया पूरी करें।

क्या पहले से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी जाएगी? 

सरकार अब पूरी तरह से फंस गई है।एक तरफ वे शिक्षक हैं जो शिक्षण कार्य कर रहे हैं और एक तरफ वे अभ्यर्थी है जिनके साथ अन्याय हुआ है अर्थात जिन्हें नौकरी मिल जानी चाहिए थी लेकिन मिली नहीं। अब सरकार कुछ भी करे इन दोनों तरह के अभ्यर्थियों में से एक के गुस्से का सामना तो करना ही पडेगा। आलोचना सरकार की होनी ही होनी है।बाकी रही बात कार्यरत शिक्षकों की तो जितने नए अभ्यर्थियों का चयन होगा उतने कार्यरत शिक्षकों को नौकरी से हाथ धोना ही पडेगा। हालांकि कोर्ट ने एक राहत जरूर दिया है और वो ये कि वर्तमान सत्र तक कार्यरत शिक्षक पढाते रहेंगे भले ही नौकरी चली जाए ताकि बच्चों की पढाई खराब न हो।

सरकार के द्वारा की गई इतनी बडी गलती या धांधली के बारे में आपका क्या विचार है कमेंट करके जरूर बताइए।

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